शान्ति पर्व  अध्याय २९४

वसिष्ठ उवाच

विधूम इव सप्तार्चिरादित्य इव रश्मिमान् |  २०   क
वैद्युतोऽग्निरिवाकाशे दृश्यतेऽऽत्मा तथात्मनि ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति