आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७४

वैशम्पाय़न उवाच

स तैर्विद्धो महानागो विस्रवन्रुधिरं वभौ |  २०   क
हिमवानिव शैलेन्द्रो वहुप्रस्रवणस्तदा ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति