menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २९४
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
कुण्डलाभ्यां विमुक्तोऽहं वर्मणा सहजेन च |  १२   क
गमनीय़ो भविष्यामि शत्रूणां द्विजसत्तम ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति