वन पर्व  अध्याय २९४

कर्ण उवाच

अवनिं प्रमदा गाश्च निर्वापं वहुवार्षिकम् |  ६   क
तत्ते विप्र प्रदास्यामि न तु वर्म न कुण्डले ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति