menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
chevron_left
chevron_right
वसिष्ठ उवाच
गुणा गुणेषु लीय़न्ते तदैका प्रकृतिर्भवेत् |  १६   क
क्षेत्रज्ञोऽपि यदा तात तत्क्षेत्रे सम्प्रलीय़ते ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति