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शान्ति पर्व
अध्याय २९५
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वसिष्ठ उवाच
न चाय़मपराधोऽस्या अपराधो ह्ययं मम |  ३३   क
योऽहमत्राभवं सक्तः पराङ्मुखमुपस्थितः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति