वन पर्व  अध्याय २६६

मार्कण्डेय़ उवाच

अथापि घटतेऽस्माकमर्थे वानरपुङ्गवः |  ११   क
तमादाय़ैहि काकुत्स्थ त्वरावान्भव मा चिरम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति