अनुशासन पर्व  अध्याय १३४

भीष्म उवाच

या नारी प्रय़ता दक्षा या नारी पुत्रिणी भवेत् |  ४१   क
पतिप्रिय़ा पतिप्राणा सा नारी धर्मभागिनी ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति