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शान्ति पर्व
अध्याय २९५
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वसिष्ठ उवाच
पञ्चविंशात्परं तत्त्वं न पश्यति नराधिप |  ४५   क
साङ्ख्यानां तु परं तत्र यथावदनुवर्णितम् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति