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वन पर्व
अध्याय २९५
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वैशम्पाय़न उवाच
सन्नद्धा धन्विनः सर्वे प्राद्रवन्नरपुङ्गवाः |  १२   क
व्राह्मणार्थे यतन्तस्ते शीघ्रमन्वगमन्मृगम् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति