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शान्ति पर्व
अध्याय २९६
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वसिष्ठ उवाच
कराल मा ते भय़मस्तु किं चि; देतच्छ्रुतं व्रह्म परं त्वय़ाद्य |  ३७   क
यथावदुक्तं परमं पवित्रं; निःशोकमत्यन्तमनादिमध्यम् ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति