आदि पर्व  अध्याय ९०

वैशम्पाय़न उवाच

अय़ुतनाय़ी खलु पृथुश्रवसो दुहितरमुपय़ेमे भासां नाम |  २०   क
तस्यामस्य जज्ञे अक्रोधनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति