वन पर्व  अध्याय २९६

वैशम्पाय़न उवाच

पानीय़मन्तिके पश्य वृक्षान्वाप्युदकाश्रय़ान् |  ६   क
इमे हि भ्रातरः श्रान्तास्तव तात पिपासिताः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति