आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

तव पुत्रा दुरात्मानः प्रतप्ताश्चैव मन्युना |  १८३   क
लुव्धा दुर्वृत्तभूय़िष्ठा न ताञ्शोचितुमर्हसि ||  १८३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति