वन पर्व  अध्याय २९७

यक्ष उवाच

न पेय़मुदकं राजन्प्राणानिह परीप्सता |  २३   क
पार्थ मा साहसं कार्षीर्मम पूर्वपरिग्रहः |  २३   ख
प्रश्नानुक्त्वा तु कौन्तेय़ ततः पिव हरस्व च ||  २३   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति