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वन पर्व
अध्याय २९७
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वैशम्पाय़न उवाच
स दीर्घमुष्णं निःश्वस्य शोकवाष्पपरिप्लुतः |  ३   क
वुद्ध्या विचिन्तय़ामास वीराः केन निपातिताः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति