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वन पर्व
अध्याय २९७
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यक्ष उवाच
किमेकं यज्ञिय़ं साम किमेकं यज्ञिय़ं यजुः |  ३४   क
का चैका वृश्चते यज्ञं कां यज्ञो नातिवर्तते ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति