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वन पर्व
अध्याय २९७
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युधिष्ठिर उवाच
प्राणो वै यज्ञिय़ं साम मनो वै यज्ञिय़ं यजुः |  ३५   क
वागेका वृश्चते यज्ञं तां यज्ञो नातिवर्तते ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति