वन पर्व  अध्याय २९७

यक्ष उवाच

का दिक्किमुदकं प्रोक्तं किमन्नं पार्थ किं विषम् |  ६०   क
श्राद्धस्य कालमाख्याहि ततः पिव हरस्व च ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति