आदि पर्व  अध्याय १७६

वैशम्पाय़न उवाच

यज्ञसेनस्य कामस्तु पाण्डवाय़ किरीटिने |  ८   क
कृष्णां दद्यामिति सदा न चैतद्विवृणोति सः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति