वन पर्व  अध्याय २९७

युधिष्ठिर उवाच

धर्मशीलः सदा राजा इति मां मानवा विदुः |  ७२   क
स्वधर्मान्न चलिष्यामि नकुलो यक्ष जीवतु ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति