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शान्ति पर्व
अध्याय २९९
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याज्ञवल्क्य उवाच
अव्यक्तस्य नरश्रेष्ठ कालसङ्ख्यां निवोध मे |  १   क
पञ्च कल्पसहस्राणि द्विगुणान्यहरुच्यते ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति