शान्ति पर्व  अध्याय ३१२

भीष्म उवाच

स विदेहानतिक्रम्य समृद्धजनसेवितान् |  २२   क
मिथिलोपवनं रम्यमाससाद महर्द्धिमत् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति