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शान्ति पर्व
अध्याय २९९
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याज्ञवल्क्य उवाच
अन्योन्यं स्पृहय़न्त्येते अन्योन्यस्य हिते रताः |  १२   क
अन्योन्यमभिमन्यन्ते अन्योन्यस्पर्धिनस्तथा ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति