अनुशासन पर्व  अध्याय ४८

भीष्म उवाच

अनार्यत्वमनाचारः क्रूरत्वं निष्क्रिय़ात्मता |  ४०   क
पुरुषं व्यञ्जय़न्तीह लोके कलुषय़ोनिजम् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति