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शान्ति पर्व
अध्याय २९९
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याज्ञवल्क्य उवाच
संवत्सरमुषित्वाण्डे निष्क्रम्य च महामुनिः |  ४   क
सन्दधेऽर्धं महीं कृत्स्नां दिवमर्धं प्रजापतिः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति