वन पर्व  अध्याय २९९

वैशम्पाय़न उवाच

अवेक्षय़ा महाराज तव गाण्डीवधन्वना |  २२   क
धर्मानुगतय़ा वुद्ध्या न किञ्चित्साहसं कृतम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति