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आदि पर्व
अध्याय ३
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सूत उवाच
स पौष्यं पुनरुवाच |  १११   क
न युक्तं भवता वय़मनृतेनोपचरितुम् |  १११   ख
न हि ते क्षत्रिय़ान्तःपुरे संनिहिता |  १११   ग
नैनां पश्यामीति ||  १११   घ
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति