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वन पर्व
अध्याय १३२
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लोमश उवाच
तौ जग्मतुर्मातुलभागिनेय़ौ; यज्ञं समृद्धं जनकस्य राज्ञः |  २०   क
अष्टावक्रः पथि राज्ञा समेत्य; उत्सार्यमाणो वाक्यमिदं जगाद ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति