menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २५२
chevron_left
chevron_right
द्रौपद्यु उवाच
न सम्भ्रमं गन्तुमहं हि शक्ष्ये; त्वय़ा नृशंसेन विकृष्यमाणा |  २१   क
समागताहं हि कुरुप्रवीरैः; पुनर्वनं काम्यकमागता च ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति