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आदि पर्व
अध्याय १५५
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व्राह्मण उवाच
नीलोत्पलसमो गन्धो यस्याः क्रोशात्प्रवाय़ति |  ४३   क
या विभर्ति परं रूपं यस्या नास्त्युपमा भुवि ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति