आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

सुरूपाश्च विरूपाश्च तथा कल्माषकुण्डलाः |  १४०   क
आदित्यवन्नाकपृष्ठे रेजुरैरावतोद्भवाः ||  १४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति