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आदि पर्व
अध्याय ३
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सूत उवाच
त्रीण्यर्पितान्यत्र शतानि मध्ये; षष्टिश्च नित्यं चरति ध्रुवेऽस्मिन् |  १५०   क
चक्रे चतुर्विंशतिपर्वय़ोगे; षड्यत्कुमाराः परिवर्तय़न्ति ||  १५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति