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आदि पर्व
अध्याय ३
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सूत उवाच
तन्त्रं चेदं विश्वरूपं युवत्यौ; वय़तस्तन्तून्सततं वर्तय़न्त्यौ |  १५१   क
कृष्णान्सितांश्चैव विवर्तय़न्त्यौ; भूतान्यजस्रं भुवनानि चैव ||  १५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति