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विराट पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
इति कर्णं व्रुवन्नेव वीभत्सुरपराजितः |  १५   क
अभ्ययाद्विसृजन्वाणान्काय़ावरणभेदिनः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति