आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

पुरुषश्चापि मय़ा दृष्टः |  १६९   क
स पुनः कः ||  १६९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति