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आदि पर्व
अध्याय ३
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सूत उवाच
तेनैवमुक्ता भ्रातरस्तस्य तथा चक्रुः |  १८   क
स तथा भ्रातृन्सन्दिश्य तक्षशिलां प्रत्यभिप्रतस्थे |  १८   ख
तं च देशं वशे स्थापय़ामास ||  १८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति