आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

राजर्षिवंशगोप्तारममरप्रतिमं नृपम् |  १८९   क
जघान काश्यपं चैव न्यवर्तय़त पापकृत् ||  १८९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति