आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

स एवमुक्त उपाध्याय़ेन प्रत्युवाच |  ४०   क
भगवते निवेद्य पूर्वमपरं चरामि |  ४०   ख
तेन वृत्तिं कल्पय़ामीति ||  ४०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति