आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

स कदाचिदरण्ये क्षुधार्तोऽर्कपत्राण्यभक्षय़त् ||  ५१   क
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति