आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

स एवमुक्त उपाध्याय़ेन स्तोतुं प्रचक्रमे देवावश्विनौ वाग्भिरृग्भिः ||  ५९   क
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति