आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

स तां पुनरुवाच |  ६   क
नापराध्यामि किञ्चित् |  ६   ख
नावेक्षे हवींषि नावलिह इति ||  ६   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति