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आदि पर्व
अध्याय ३
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सूत उवाच
युवां दिशो जनय़थो दशाग्रे; समानं मूर्ध्नि रथय़ा विय़न्ति |  ६७   क
तासां यातमृषय़ोऽनुप्रय़ान्ति; देवा मनुष्याः क्षितिमाचरन्ति ||  ६७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति