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द्रोण पर्व
अध्याय ८६
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युधिष्ठिर उवाच
करिष्ये परमं यत्नमात्मनो रक्षणं प्रति |  ४०   क
गच्छ त्वं समनुज्ञातो यत्र यातो धनञ्जय़ः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति