शान्ति पर्व  अध्याय ३

नारद उवाच

तस्य कर्णस्तदाचष्ट कृमिणा परिभक्षणम् |  १२   क
ददर्श रामस्तं चापि कृमिं सूकरसंनिभम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति