शान्ति पर्व  अध्याय ३

नारद उवाच

सोऽव्रवीदहमासं प्राग्गृत्सो नाम महासुरः |  १९   क
पुरा देवय़ुगे तात भृगोस्तुल्यवय़ा इव ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति