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अनुशासन पर्व
अध्याय ३
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युधिष्ठिर उवाच
वाग्भिश्च भगवान्येन देवसेनाग्रगः प्रभुः |  १४   क
स्तुतः प्रीतमनाश्चासीच्छापाच्चैनममोचय़त् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति