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द्रोण पर्व
अध्याय १००
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धृतराष्ट्र उवाच
एकस्य च वहूनां च संनिपातो महाहवे |  २४   क
विशेषतो नृपतिना विषमः प्रतिभाति मे ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति