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द्रोण पर्व
अध्याय १०१
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सञ्जय़ उवाच
ततो निष्टानको घोरः पाण्डवानामजाय़त |  ४८   क
द्रोणेन वध्यमानेषु सैन्येषु भरतर्षभ ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति