आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३

वैशम्पाय़न उवाच

तत्स राजा महाराज पाण्डवानां धुरन्धरः |  ६   क
पूजय़ित्वा वचस्तत्तदकार्षीत्परवीरहा ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति