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शल्य पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
स मेघनिनदो हर्षाद्विनदन्निव गोवृषः |  ६   क
आजुहाव ततः पार्थं युद्धाय़ युधि वीर्यवान् ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति